बिछड़ने का दर्द
चले गए तुम, छूटा वो बंधन,
दिल की धड़कन में रह गया एक चिह्न।
बीते लम्हों की यादों का पहर,
अब खुद से ही हो गया ये सफर।
तुम्हारी हंसी, वो बातें पुरानी,
अब हैं बस ख्वाब, हैं बातें फ़रेबी।
आँखों में नमी, जज़्बातों की बारिश,
दिल में छिपा है, एक गहरा ग़म की फ़रिश।
तुझसे जो जुड़ा था, वो रिश्ता अधूरा,
इश्क की दुनिया, अब हो गई ना पूरा।
खुद को संभालना, सिखा आज मैंने,
तू जाने, पर मैंने खुद को पहचाना।
भूल जाऊं तुझे, ये सोचा कभी,
पर तेरी यादें हैं, जैसे चाँदनी।
बिछड़ना था तेरा, ये भी था लिखा,
दिल के उस कोने में, रह गया तेरा नाम अभी।
चलूँ अब मैं, अपनी राहें भुलाकर,
सपनों की चाह में, खुद को खोज लाकर।
बिछड़ने का ये दर्द, एक दिन सह जाएगा,
लेकिन तेरा साथ, हमेशा याद आएगा।
-कवि लोकेश
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