ब्रेकअप की रात है, अब खोज में हैं जो राह,
कभी थे हम साथ, आज अलग है किनारा।
दिल में छलकता है रौंद, अब दिखता न हकीकत,
क्यों टूटा हमारा प्यार, क्यों हुआ इतना विचित्र।
कहीं ढूंढना चाहेंगे हम, फिर से वह वक़्त,
क्यों की इश्क की रिवायत, लिपट गयी है दिल के क्षण।
लेकिन इस ब्रेकअप का सच बहुत ही कठिन है,
दुख का आह्वान करता है, सिर्फ बिन बातों की वाणी।
शायद है सही, या फिर गलत, में क्या करता,
पर जिंदगी की यह खामोशी, दिल को तोड़ने की यात्रा।
ब्रेकअप की रात है, अब खोज में हैं जो राह,
कभी थे हम साथ, आज अलग है किनारा।
-कवि लोकेश
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