इश्क़ था जो हमने किया था,
दिल की बातें कहते थे एक दूजे से छुपाया था।
पर अब वो प्यार कहाँ है,
वो तक़दीर की रेखा टूट जाने का ग़म कहाँ है।
हमारी मोहब्बत को भुला दिया तूने,
बिना कुछ कहे हमें छोड़ दिया तूने।
कितनी मुश्किल से टूटती थी हमारी दो ज़िंदगी,
इस तन्हाई में अब तेरा एकरा होना ही क़दर आती है।
हमने तो सोचा था तेरे बिना कैसे जिएंगे हम,
किसी और के प्यार में मर जाएंगे हम।
पर आज भी तुझे याद करते हैं हम,
कहीं न महसूस हो तू कभी हमें कम।
लेकिन अब वो लम्हे वापिस नहीं आ सकते,
हमारी जिंदगी अब एक अधूरी कहानी बन गई है।
तू अब हाथ भी नहीं थामता,
कैसे भूलेगा तू जो हमने तुझसे प्यार किया था।
अब ये सच है कि हम अलग हो गए हैं,
दो प्यार के राहें अब भटक गए हैं।
पर हम अपने दिल का दर्द छुपा लेते हैं,
और तेरी यादों से दिल को सम्भला लेते हैं।
अब वो लम्हे भी भूल जाएंगे जो हमने साथ बिताए थे,
दर्द के साथ हम अपने आप को जीने का सिखाएंगे।
-कवि लोकेश
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