तुम्हारे बिना एक दर्द सा है,
खोजता हूँ तुम्हें हर जगह।
क्यों नहीं आते मेरे पास,
क्यों बनी हमारी ये दूरियां, अनजान सच।
तुम्हारी यादों से मुझे तकलीफ है,
चाहता हूँ तुम्हें पास।
कितना भी कोशिश करूँ मैं,
तुम्हें खो चुका हूँ, जो अब नासमझ सच।
जब साथ थे तो लगता था,
हर बात सहज थी, हर पल प्यारा।
अब तेरी खोज में दीवाना हूँ,
क्यों बिछड़ गए हम, मुझको कुछ तो बयान सच।
तुम्हे भूलना चाहूँ, फिर भी,
तुम्हारी यादें मेरे दिल को छू जाती है।
क्या करूँ, कैसे जीऊँ मैं,
तुम्हारे बिना कैसे जिऊँ, ये नासमझ सच।
इस बिछड़े दिल को आराम चाहिए,
तुम्हारे बिना जीना अब मुश्किल है।
कुछ कहूँ, कुछ कहूँ नहीं,
बस तुमसे एक आहती दुआ मांग रहा हूँ, दर्दभरी सच।
-कवि लोकेश
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