आँसू बुंद बुंद हो रहे हैं,
दिल टूटा टूटा सा महसूस हो रहा है।
वो पल याद आ रहे हैं,
जब हमने साथ खुशियाँ मनाई थी।
तुम्हारी यादों में खो जाने की,
बात क़ायम है मेरी सदियों तक।
मन्ने भी नहीं कर पाऊँगा,
कि हमारे बीच में अब कुछ नहीं बचा।
तुम्हें दूर जाने का,
दर्द मुझे सहना पड़ रहा है।
तुम्हें खोने का गम मेरे,
दिल को जैसे चुरा रहा है।
कैसे भूलाऊँ तुम्हें,
कैसे छोड़ूँ ये ख्याल।
सोचता हूँ दिन रात,
मगर खोया हुआ मिली नहीं।
ब्रेकअप की वजह पूछते हैं सब,
पर कभी मुझसे पूछते नहीं।
छूपाने की खोज में हूँ मैं,
मगर खुदा को सचाई से डर लगती है।
हौले हौले से दिल टूटता है,
और सुने सुने रातें आती हैं।
अब कूद परे प्यार के झरोखों में,
कहीं फिर से मिल न जाऊँ तुम्हें।
ख़ामोशी से चल रहे हैं,
हमारे प्यार के खींचे तारे।
आंसू बाँधकर रख लिए हैं,
मगर सच्चे दर्द हर मोड़ पर उभर आते हैं।
– हमसफ़र
-कवि लोकेश
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