तुम्हारे बिना जीना मुझे यहाँ तक आसान लगता था,
तुम्हारे बिना एक अजनबी सा मेरा जीवन लगता था।
तुम्हारे साथ बीती हर पल मुझे खुशियों में बहार लगती थी,
नाज़ाने क्यों अब तुम्हे खोकर बीते लम्हे बेकार लगते है।
जबसे तुम जाने चले गए हो, मेरा दिल एक शिकार लगता है,
तुम्हें भुलाने की कोशिश की छुप-छुप, पर सब बेकार लगता है।
गलती मेरी थी या तुम्हारी, इस सवाल का जवाब मुझे नहीं मिलता,
अब सिर्फ यादें बची है और दर्द ही मिलता है, जब तुम्हारा नाम लेता हूँ।
तुम्हारे बिना मेरा दिल आज भी तुम्हारी ख्यालों में उलझा है,
इस दर्द को भुलाना मुश्किल है, इसे सुलझाना और भी बड़ा है।
जिस दिन हमने अलविदा कहा, उस दिन से मेरा दिल टूटा है,
वो क्या था, वो क्या नहीं था, ये सब करते-करते अब मेरे दिल का दरवाजा बंद है।
चाह कर भी तुम्हें भूल नहीं पाता,
यादों की ये बारिश, दिल को बहुत तरसाता।
कोई भी न कहे इसे अलविदा,
दुआ करता हूँ, बस तू खुश रह।
अपने तजुर्बे की ढेर सी नसीहतें देता हूँ,
क्यूं कि ये दिल फिर से कभी नहीं टूट पाता।
-कवि लोकेश
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