दिल के तुकड़े कहते हैं,
मोहब्बत का ऐसा लानत से खेल,
अलविदा कह गए हम,
बिना वजह किया धोखा इस तूफान में सखेल।
रात भर सोये न जाने,
क्या किया हमने पाप,
मेहबूब थे तुम मेरे,
फिर क्यों किया मेरे साथ व्यवहार स्वप्न।
ख्वाबों के दुनिया में हमने खो दिया,
सनम ने मेरी नियत बिगड़ी,
अब तन्हाई की राह पे चला हूं,
खुद से खामोशी करके क़दम बिचाया छले।
ये ग़म की रातें, ये थका हुआ दिन,
खुदा से मेरी पुकार है,
क्यों छेड़ा मेरा प्यार तूने,
क्यों दिया मुझे इतना प्यार बहाने।
बदला लेना चाहता हूं मैं,
तेरी ज़रूरत बिना जीना चाहता हूं,
फिर भी दिल तेरी यादों में है डूबा,
जाने क्यों, तू मेरा ख्वाब बिगाड़ा छले।
चला जाने किसी और की राहों पे तू,
मेरी तन्हाइयों की प्यास बुझा दे,
यादों की बंधने से जो खो जाऊं,
देख ले, मैं भी तुझे भूल जाऊं।
हो सके तो यादों के जंजीरों को तोड़ दे,
अलविदा कहके, दरवाजा बंद कर दे,
मेरी जिंदगी में तू सिर्फ एक पल था,
बिना कुछ कहे, तू चला जा, हाँ चला जा।
-कवि लोकेश
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