दिल का दर्द, इस तन्हाई में
सोचता हूँ, वो क्यों नहीं हो सकती
अपनी तकदीर को झेल रहा हूँ
क्योंकि तुमने मेरे साथ तोड़ दिया
तुम्हें समझने की कोशिश की हर दिन
पर तुम्हारे लव में मैंने
खो दिया अपना अपना आत्मविश्वास
तुम्हारे लव की कटासमंदी ने
दर्द दिल के मरहम को गीला कर दिया
जिन्दगी की आंधी में छोड़ दिया
तुमने मेरी उम्मीदों को तोड़ दिया
अब मेरी दिन जलते रहेंगे
मैंने तुम्हें खो दिया
मेरे ख्वाब टूट गए
तुम्हारी यादें मेरे दिल को चूम रही हैं
लेकिन तुम कहीं दिखाई नहीं देतीं
मैं अकेला हूँ, तुमने मुझे छोड़ दिया
मेरी खुशियों को तुमने उड़ा दिया
मैं अपने भाग्य के खेल में हूँ
क्योंकि तुमने मेरे साथ छोड़ दिया।
-कवि लोकेश
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