वो रातें भी क्या रातें थीं,
तुम्हारे बिना सुनी-सुनी थीं।
जब तक तुम थे, सब अच्छा था,
अब तुम दूर, सब खराब था।
तुम्हें चाहना था मेरी खता,
मुझे यकीन था तेरे सच्चे आ जाएगा।
लेकिन बिछड़ा, दिल टूटा,
कुछ इस तरह बदला सर उठा।
क्योंकि प्यार था या फिर दिखावा,
अब सब बेमतलब लगता है जाना।
तोड़ दिया है इस जिंदगी ने हमें,
यादें हैं बहुत, दर्द भी है कम नहीं।
पर आगे चलना होगा तो,
दिल को संभाल कर, खुद को संभाल कर।
वैसे भी, ज़िन्दगी है एक सफ़र,
दुःख सहकर ही मिलता है मंजर।
ब्रेकअप क्या होता है, इसे समझो,
बस एक नई शुरुआत, एक नई क़िशोरी हो।
-कवि लोकेश
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