बिछड़ा है तो क्या हुआ,
ये तो तोड़ना है मना।
दिल के रिश्तों का जाल,
टूटा है तो क्या हुआ।
तेरी यादों की बरसात,
अब बरसने नहीं दूंगा।
तेरी चाहत का दरिया,
अब बहाने नहीं दूंगा।
छोड़ जाना था तो क्यों कर साथ,
मेरे दिल को फिर से जलाया।
तूने मेरे दिल को तोड़ा,
फिर सोचा क्यों नहीं निभाया।
अब मिलना मुश्किल हो गया,
बातें करना गिनती थमी।
बुरा लगता है दर्द हमारा,
अब कोई दवा नहीं भर सकती।
समझो तुम भी, सोचो ए प्यारी,
अब हमारा मिलना मुश्किल।
ये अलविदा का समय है,
अब कोई फिर से नहीं जोड़ सकता निति।।
-कवि लोकेश
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