तुमसे बिछड़े, तुम्हारे बिना
हमने जीना सीख लिया है
तुम्हें भूलना, हमने सीख लिया है
वो ज़माना भी था, जब तुम्हारे साथ
हर सुबह हमारे लिए सुबह बन जाती थी
हर रात तुम्हारी यादों में खो जाते थे
पर अब तुमसे दूर हो गए हम
अलग राहों में चलना पड़ा हमें
अपनी तक़दीर से मोहब्बत का साथ छूट गया हमसे
तुमसे मुलाकातें हैं अब सिर्फ यादों में
तुम्हें भूलाने की हर कोशिश हो जाती है निराशा में
पर फिर भी खुद को समेट कर सुकून को ढूंढते हैं हम
तुम्हारी यादों की छाया हमारे दिल में बसी है
पर अब तुम्हारा नाम लेने में भी दर्द होता है
कभी-कभी लगता है, क्या हमने सच्ची मोहब्बत की थी?
बिछड़े हम, अब अपनी तक़दीर का राज जान गए हैं
वो रिश्तों की चमक, जो हमने खो दी थी
तुम सही थे, हम गलत थे – यही ब्रेकअप की सच्चाई है।
-कवि लोकेश
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