तुमसे दूर होकर भी,
तन्हाई में तुम्हें धुंदता हूं।
मेरे दिल की गहराइयों में,
तुम्हारी यादें छुपता हूं।।
इंतजार की राहों में,
तुम्हारी ख़ता मानता हूं।
कुछ भी कहने को नहीं है,
कुछ अधूरा रह जाता हूं।।
जुदा होने की धज्जियाँ खेलती हूं,
तुमसे मिलने की आस जगाती हूं।
प्यार की नगमा सुना है,
उसके धुंधले सा रंग देखता हूं।।
एक नयी दुनिया में खो गया हूं,
तुम्हारी यादों में भटक गया हूं।
दर्द और गम से भरी रातें,
तुम्हारी कमी से उजड़ गई हूं।।
अलविदा कहने से पहले,
एक अंतिम बार मिलना चाहता हूं।
तुमसे जुदा होने का दर्द,
हमेशा-हमेशा के लिए समझता हूं।।
-कवि लोकेश
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