तोड़ दी तुझसे मेरी राहें,
बिखर गईं सपनों की बाहें।
जो रहे थे हम कभी पास,
अब है बस यादों का ख्वाब खास।
तेरे साथ हंसना, रोना,
अब उन लम्हों में है सूनापन छेड़ना।
तेरे बिना मेरी धड़कन सुनी,
जाते-जाते तूने दिल की भी कहानी बदली।
हर मोड़ पर तेरा साया था,
अब खाली हैं वो आसमान और जमीं का साया था।
खुशियों की रंगीनियों में,
गम का एक अधूरा गीत छिपा था।
विपरीत हवाओं में तन्हाई,
दिल ने किया तुझसे विदाई।
समय के साथ सब कुछ भुला दूँ,
लेकिन तेरे साथ बिताए पल, कैसे भुला दूँ?
चले जाओ तुम अपनी राह,
मैं चलूँगा अपनी तलाश में कहीं दूर,
बस याद रखना, हर एक शाम,
तू बनकर यादों में रहेगा, मेरा ये ग़म भी शुभकामना जैसे किसी का नाम।
-कवि लोकेश
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