दिल टूटा, ख्वाब सजने से हो गए अधूरे,
तेरी यादों की याद में अब रातें हैं सियाह।
तू चला गया दिल से, छोड़ के मेरे जीने की राह,
आंसू बहाते हुए बेखुदी में हो गए खुद को खो बैठे।
जीवन का सफर एकला हो गया बिना तेरी साथ,
तू नहीं है मेरे साथ, अब दिल में है तेरी याद का भार।
तुझसे मिलने की चाहत में मानो दिल बेचैन,
पर तू न देता था मुझे वो प्यार, और मेरी बातें थीं बेमान।
संग चलते थे हम जीने के राह पर,
पर अब खुद को ढूंढना पड़ेगा, खुद को दुखी होकर।
जब तू छोड़ कर चला गया, तब जीना हुआ मुश्किल,
पर अब मैं भी नया चेहरा ढूंढूँगा, खुद के साथ जीने की कोशिश करूँगा।
दिल टूटा, ख्वाब सजने से हो गए अधूरे,
पर खुद को फिर से ढूंढूँगा, दूर हो जाऊँगा तेरी यादों से।
-कवि लोकेश
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