मोहब्बत की यादें
तेरे बिना ये दिल सुनसान है,
तू चला गया, अब दिन बेहिसाब है।
जुदाई के इस गहरे साये में,
ख्वाबों की खुशबू भी बेगानी है।
महकते लम्हे, अब हैं वीरान,
तेरे साथ गुजरे पल समझ में आए अनजान।
हँसते थे हम, अब रोना है फसाना,
क्या प्यार सिर्फ एक खेल था, ये सवाल है पुराना।
तेरी हंसी, अब मेरे मन की पीड़ा,
चाहत की रेत में खो गया सब कुछ।
तेरी यादों का ये गहरा सागर,
हर लहर में तेरा नाम, दिल की गहराई में अमर।
फिर से मुस्कुराने की होगी चाह,
पर तेरे बिना अधूरी हर एक राह।
चल पड़े हैं हम अपनी-अपनी ओर,
पर दिल की किताब में हमेशा रहेगा तेरा छोर।
छोड़ दिया तुझे, पर ये दिल नहीं भूला,
हर धड़कन में बसी है तेरी धुन निराला।
विराम मिला प्यार का, पर जख्म गहरा है,
इस टूटे रिश्ते का, दर्द अब भी सहा है।
-कवि लोकेश
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