प्रेरणा का दीप
जब भी गहरे अंधेरे में, राह भुलाने लगे,
मन की शक्ति जगे, जब हिम्मत थकाने लगे।
सपने हैं अनमोल रतन, सपने हैं अनोखे,
हर मुश्किल का है हल, जब हौंसले हों जोशे।
चढ़ती धूप, बरसातें, सब सहना है हमें,
हर बाधा से लड़कर, आगे बढ़ना है हमें।
पर्वतों से ऊँचे हों, ये सपने हमारी,
सपनों की दुनिया में, जगाएँगी सारी।
कभी ना देखो पीछे, आगे की ओर चलो,
फौत ना होने दो वक़्त, बस आगे बढ़ते रहो।
प्रेरणा की किरण से, रौशन कर लो मन,
हर मुश्किल का सामना, है सिर्फ तुमसे बन।
अपने अंदर छिपी है, ताकत बेइंतहा,
खुद पर विश्वास रखो, बन जाओ तुम खुदा।
यह जिंदगी का सफर है, रंग-बिरंगा नज़ारा,
हिम्मत से मिलता है, हर सपना सच्चा प्यारा।
तो चलो साथी, आज पहल करें हम,
प्रेरणा का दीप जलाकर, सपनों का सफर करें हम।
-कवि लोकेश
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