जीवन के सागर में डूबी हुई चिंगारी,
वह कुछ नहीं जो होता है खुद ही प्रेरणा की बात भली।
आग आज है उसको बुझाने की तो,
मुट्ठी में समझा उस चिंगारी को निकालने की।
चिंगारी से जलता है जीना जीवन का,
गहराई तक जा कर ही मिलेगा इंसान को आभास उस सिख का।
हार न मान इस जंग को, तू चमकाने के लिए है तैयार,
प्रेरणा है वह चिंगारी, जो सुनहरा भविष्य सजाने के लिए है तैयार।
-कवि लोकेश
Discover more from Kavya Manthan
Subscribe to get the latest posts sent to your email.