तुम्हारे बिना मेरी जिंदगी बेहाल है,
बिना तुम्हारे मेरे सपने थम गए है।
तुम्हारी वजह से खोई है मेरी खुशियाँ,
अब तो बस तन्हाई है मेरी साथी।
जिंदगी का सबसे दर्द तुम्हारे बिना है,
कैसे भूला दूँ मैं तुम्हे ऐ जान।
तुम्हारे साथ रहते थे सब सपने हकीकत,
अब क्या फायदा है इस ज़िन्दगी के राही।
कहो न तुम मुझसे दुखी हो गए हो,
तुम्हारी बिना मैं बेखुदी से जी रही हूँ।
चाहे जितना भी कोशिश करो मुझसे दूर जाने की,
तुम मेरी दिल में एक ख्वाब बनकर रहोगे।
साथ थे हमेशा, मिलकर बिछाए थे आखों में सपने,
तन्हाई में भी तुम्हारा अब हमेशा अहसास रहेगा।
ना कोई उम्मीद है, ना ही खौफ है,
बस ये हकीकत है कि मेरी जिंदगी में अब तुम नहीं।
-कवि लोकेश
Discover more from Kavya Manthan
Subscribe to get the latest posts sent to your email.