बिछड़े हुए ख्वाबों की महक में बसा,
तेरा मेरा रिश्ता, जैसे कोई नज़ारा।
चाँदनी रातों में, तेरे संग बिताए,
दिल की हर धड़कन में, तेरा ही नज़ारा।
रंगबिरंगी यादों का संगम है ये,
तेरी हंसती आँखों में, खो जाता सारा।
हर लम्हा तेरा, हर बात में तेरा,
प्यार की खुशबू से महका है ये सारा।
जैसे बारिश में जलती हुई धरती,
तेरे बिना सूनी, जैसे कोई बंजर सहरा।
तेरे नाम की लहरों में बहने लगा हूं,
तेरा ही दीवाना, मेरा हर एक सहरा।
प्यार का ये प्याला, जाम सा भरता,
तेरे नाम की मिठास, मेरी ज़िंदगी का नज़ारा।
हर सुबह तेरे साथ, हर शाम तेरा ख्याल,
इस दिल की दास्तान में, तू ही तू है सारा।
-कवि लोकेश
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