तुझसे दूर चला गया मेरे दिल का राज,
लौट आएगा ना फिर से वह प्यार का साज।
दिल टूटा है मेरा, खो गया है सब कुछ,
तुझसे जुदा होकर, मिल भी नहीं सकता कुछ।
क्यों किया तू मुझसे ऐसा विश्वासघात,
क्यों छोड़कर गया तू मेरी सीने की बात।
अब तुझसे मैं नहीं चाहता कुछ भी,
जानकर भी आई नहीं मरने की चाहत।
हो जाएगा मुझसे भी अब तुझे भूलना,
क्योंकि तेरे साथ मेरी आनंद बिताना।
लेकिन हमेशा याद रहेगा तेरा साथ,
गुड़गुड़ाती हंसी, वह मिठासी रात।
फिर भी अब निभाना होगा इस तंगेदाढ़,
क्योंकि है यह जिंदगी, हर किसी के लिए कठिनार्थ।
-कवि लोकेश
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