तन्हाई में बैठी है, दिल मेरा रो रहा है
तेरे बिना जीने की आदत हो गई है मुश्किल
तेरा ख्याल बीच भेज कर, सोने को नहीं आता
तेरे बिना जीने का तरीका समझने को नहीं आता
तेरी यादों का आंचल भी संभाल नहीं पाता
तुझसे मिलकर जीने की आदत हो गई मुश्किल
तेरी अब यादें हैं, मेरे दिल की दवा बन गईं
तुझसे लड़ने की आदत हो गई मुश्किल
अब तू दूर है, मेरी राहों में खुदा है
तेरी खोज में जीने की आदत हो गई मुश्किल
ये तेरा ख्याल, मेरे दिल का अंजाम है
तेरे बिना जीने की आदत हो गई मुश्किल
तू नहीं है मेरे साथ, मेरी दुनिया बेगानी है
तेरे बिना जीने की आदत हो गई मुश्किल।
-कवि लोकेश
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