बिछड़ने का दर्द
तेरे बिना ये पथरीली रात,
सपनों में भी है तेरा साथ।
ख्वाबों की दुनिया अब वीरान,
तेरे साथ मिलता जो था, वो तो अब है बेजान।
हर याद में छिपी है एक कहानी,
तेरे संग बिता वक्त, अब है ज़वानी।
हंसते थे जब, वो पल याद आते,
पर अब सिर्फ आंसू हैं, जो मुझको भिगोते।
तेरा वो नज़ारा, तेरा वो हंसी,
बिछड़ने का ये अहसास, क्यूं करती है खींची।
खुद को भूल गया, तेरे बिना जियूँ कैसे?
सुलगते दिल के जख्म, मैं छुपाऊँ कैसे?
कुछ रिश्ते होते हैं नसीब में,
जीते हैं ताउम्र, कुछ होते हैं तात्कालिक।
तू तो बस एक याद बन कर रह गई,
तेरी कमी है, जो हर लम्हा कह गई।
चल दिए तुम, छोड़कर सब कुछ,
भूलना चाहूँ पर, दिल है बेताब।
इस दर्द को सहूँ मैं कैसे,
तेरे बिना जीने का सलीका अब है ख़त्म।
फिर भी अधूरे सपनों की उम्मीद में,
ज़िंदगी की राहों पर चलूँ मैं अकेले।
तू रह गई यादों में, सदा के लिए,
बिछड़ने का ये सफ़र, अब है मेरी कहानी।
-कवि लोकेश
Discover more from Kavya Manthan
Subscribe to get the latest posts sent to your email.