तुमसे हो गई हमारी ख़ुदा तलाक,
बेवजह तुमने टूटा हमारा इश्क.
जैसे वक़्त गुजर गया बिन वजह,
तुम भी चले गए बिन सुना बात.
हम बिगड़े रिश्तों की ख़्वाहिश छोड़,
तुमने प्रेम की मिटी मन्दार.
क्यूँ तोड़ी तुमने वो बाँधने,
जो हमने एक साथ सांझा किया था.
क्या थी वो कमी जो निभा न सका हमें,
तुमने अपनी कूरत चमकाई थी.
तुमने तोड़ा हमारा वफ़ादारी,
हमने तुम्हारे खोने को अपनाया था.
तुमने सजाया था हमारे सपने,
हमने तुम्हें सच्चाई की राह दिखाई थी.
क़ुदरत ने की थी हमें बनाया,
तुमने न समझा इस बात को.
तुम्हारी बेवफाई ने तोड़ डाली हमें,
अब तुम्हारे बिना हम जीते नहीं हैं.
-कवि लोकेश
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