बिछड़ने का सफर
दिल की धड़कनें रुकी-रुकी सी हैं,
तेरी यादों की छाया अब भी चुप्पी सी है।
जो वक्त साथ बिताया, वो लम्हे कैसे भुला दूं,
तू जो चला गया, अब मैं किससे सजा दूं।
सपनों के महल, एक पल में ढह गए,
तेरे बिना ये सफर, कितने अनगिनत भटक गए।
तेरी हंसी की गूँज, अब सन्नाटे में खो गई,
तेरे बिना ये मन की मूरत, अधूरी सी हो गई।
रुठी हुई रातें, चाँद भी उदास है,
तेरी खुशबू में बसी, हर एक सांस है।
जिन राहों पर चलते, वो अब वीरान हैं,
तेरा न होना, जैसे एक गहरी पहचान है।
खुद से मिलकर, खुद को समझना है,
दर्द की इस घड़ी में, खुद को संभालना है।
तू जो नहीं, ये सच अब मान लिया है,
दिल के इस वीराने में, बस यादों का मेला है।
बिछड़ने का ये सफर, दर्द भरा है सही,
लेकिन वक्त की दवा से, सब कुछ हो जाएगा सही।
आगे की राहें, एक नई कहानी लिखेंगी,
तू जो दूर है, पर यादें संग जी लेंगी।
-कवि लोकेश
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