बिछड़ने की बाते, दिल में छुपी हैं,
कसके बंधी यादें, अब दूर जुदा हैं।
वो हंसने की लम्हे, अब है खाली,
आँखों में गीले, सपने हैं बुने।
हर मोड़ पर तेरा, एहसास है ज्यों,
तेरे बिना ये राहें, वीरान हैं।
चाहत की रंगीनियाँ, काली होती जा रही,
खुशियों की बगिया, अब उजड़ा सा है।
जितना चाहा था तुझे, उतना ही खोया,
अब तो बस ये दिल, तन्हा हैं रोया।
लेकिन फिर भी, मैं आगे बढ़ूँगी,
इस दर्द की गहराई, एक कहानी बनेगी।
विराम नहीं है ये, बस एक मोड़ है,
नई राहों की ओर, चलने को तैयार हैं।
-कवि लोकेश
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