वादे थे हमारे, साथ चलेंगे साथ हर दरमियानी रात,
पर क्यों अब दिल में बसा, इतना गहरा दर्द-बादल छाया।
तुम्हारे चेहरे की हंसी दिखती है, मेरे ख्वाबों में हर रात,
पर क्यों अब मैं रो रहा हूँ, इतनी खोजली आँखें मिलाया।
तुमने कहा था, तुम मेरे साथ हो और मैं तुम्हारे साथ,
पर क्यों अब दिल में बसी, इतनी बेमैंली धड़कन बुझाया।
सपनों की दुनिया में हमने जीने का वादा किया था,
पर क्यों अब रात भर, मेरी आँखों में तुम्हारी याद चलाया।
अब दर्द की इस राहगुज़र पे, चलना होगा अकेले,
कोई हाथ न थामेगा, न कोई साथी होगा सहेले।
फिर भी मैं हो सकता हूँ, क्योंकि दिल में बसी है उम्मीद,
कि शायद कल कोई नया साथी मिले, जो मेरे दिल को बहलाये।।
-कवि लोकेश
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