तुम्हारे बिना जीना आसान नहीं है,
अब कैसे वो दिन लौटाऊं जब तुम याद आते हो।
तुम्हारी छोड़ ने दिया मुझे दर्द बहुत,
कैसे भूलाऊं तुम्हें जो दिन बीताए हमने साथ।
तुम्हारी ख्वाबों से जीना मुश्किल हो गया,
अब तन्हाई मुझे बहुत डरा रही है।
मोहब्बत की ये अजीब चिंता,
तुम्हारे बिना मेरी ज़िन्दगी जीना बेमिज़ाल हो गया।
कितनी रातें बिता दी हमने साथ-साथ,
अब अकेले रात सही मुझे धड़कनें सुनाई देती है।
क्यों की तुम्हारी मोहब्बत ने चूर-छार कर दिया है मुझे,
अब कैसे भूलाऊं तुम्हें जो दिन बीताए हमने साथ।
तुम्हारी यादें भर देती है मेरे दिल को दुःख,
अब जीना डुबोके सा लगता है मेरे साथ।
तुम्हारे बिना मेरी ज़िन्दगी अधूरी सी लगती है,
कैसे भूलाऊं तुम्हें जो दिन बीताए हमने साथ।
आंसू निकलते हैं हर पल तुम्हारे बिना,
कैसे भूला दूं मैं तुम्हें, जिन्दगी बिताने वाले हमने साथ।
ये है एक प्यार की कहानी का अंत,
अब बस खुदा ही है मेरी मदद करने वाला हमेशा।
-कवि लोकेश
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