दिल टूटा है, वो चाहते न हमें
बिछड़ गए हम, साथ चलते न हमें
प्यार की दास्तान थी सुहानी
अब बस यादों का जहाँी है यहाँी
कैसे भूलाऊँ उसकी मुस्कान
और उसकी दी हर गम की डाका
अब बस अलविड़ा कहना है
उससे दिल के गम को छोड़ना है
दुनिया में खो गया है सब कुछ
सिर्फ ख्वाबों की खेती रह गई है मेरे दिल की खुशी
गुम सारी रात, तरसी है नींद
मेरी तक़दीर में हुई है एक बड़ी कमी
पर छोड़ों, क्या करे अब हम
ये है जिंदगी का नियम, हो जाती है उलझन
फिर से नहीं आएगा वो पल
अब सिर्फ यादों की धुंधली खुशबू मल।।
-कवि लोकेश
Discover more from Kavya Manthan
Subscribe to get the latest posts sent to your email.