बिछड़ने का दर्द अब पलकों में छुपा,
अब तक धड़कनें तेरी ही सुनाई देती थी।
मेरे दिल की तरफ तू ना देख पाया,
कुछ इस तरह से हमारा रिश्ता टूटा।
दो दिलों की मिलती जुलती धड़कनें,
अब तन्हा है यह दिल, कोई साथी नहीं।
तूने कहा था तेरी हमेशा याद रहूंगी,
पर अब यादों में तेरी भी खोजा नहीं करूंगी।
खुश रहो तू अपनी नयी दुनिया में,
मेरी यादें तेरे साथ हों, यही काफी है मुझे।
बस एक चिट्ठी का हो सके, इंतजार करूंगी,
तेरी मोहब्बत ने किया था जैसे रंगी होम पैरी।
फिर भी इस बिछड़ने का दर्द हर रोज जागता है,
तेरे बिना जीना मुश्किल है, मगर संभलता हूं मैं।
-कवि लोकेश
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