बिछड़ने की वो रात याद है मुझे,
तेरे बिना ये दिल, उदास है मुझे।
सपनों की रेशमी दुनिया टूटी,
खामोशियों ने दी आवाज़ है मुझे।
तेरी हंसी की गूंज अब सुनाई नहीं देती,
तेरे बिना ये राह भी सूनी-सूनी लगती।
बिछड़ने का ये दर्द सहने की कोशिश,
हर लम्हा अब जैसे एक सज़ा लगती।
तेरे इश्क में खोया था मैं,
अब खो गया हूं खुद से, समझ ना पाया मैं।
तेरे बिना सब अधूरा सा लगता है,
खुशियों का वो जहां क्यों फिर से ना जगता है।
कभी सोचा था तुझसे बेपनाह मोहब्बत करेंगे,
अब दूरी की ये दीवारें सख्त लगती हैं।
फिर भी यादों के इस समंदर में तैरता रहूंगा,
तेरे बिना जीने की ख्वाहिशों को संभालता रहूंगा।
जुदाई की इस मुश्किल राह पर,
खुद को फिर से खोजूंगा,
एक नया अध्याय लिखूंगा,
आगे बढ़ूंगा, ये खुद से वादा करूंगा।
-कवि लोकेश
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