रिश्तों के वो दिन दूर हो गए,
किसी चुपके से वो ख्वाब तूटे।
दिल के रिश्ते बिछे थे ज़मीन पे,
और फिर से वो बिखरे, इतनी दूर।।
तेरी यादों में धुआँ उठाता हूँ,
तेरे ख्वाबों के साए में आता हूँ।
काव्य में तुझको ढूँढता हूँ,
क्योंकि तू मुझको छोड़ कर जाता हूँ।।
दर्द सही है, फिर भी दिल रोता है,
खुशियों का सफर अब थम गया है।
तू किसी और के हो गया है,
मेरी जिंदगी अब तेरे बिना फुर्सत में है।।
तेरे बिना हर दिन उदास है,
तेरी यादों में दिल बेहलता है।
अलविदा कहकर तू चल दिया,
मगर मेरी दुनिया अब खाली सी है।।
तेरी यादों से जुदा होना मुश्किल है,
पर मैं अपने आप को सहारे के रुप में ढूँढ लूँगी।
तू तो चला गया, पर मेरी ख्वाहिश है,
के इस दर्द को भुला कर मैं खुशियों की नयी दुनिया बनाऊंगी।।
-कवि लोकेश
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