टूटना
तारों की चादर में, बिखर गया सपना,
तेरी मेरी प्रेम कहानी, अब रह गई खामोशी का कश्मकश।
दिल की गहराइयों में, सुन-सुन के तेरा नाम,
पर अब वो लम्हें, हैं जैसे जादू का बर्बाद काम।
रास्ते अलग हो गए, जुड़ना था जो कभी,
छोड़ गए साथ, हम दोनों ही अब अजनबी।
तेरी मुस्कान में छिपा, अब दर्द का एहसास,
भूलना चाहूँ तुझे, पर होता है निराश।
चांदनी रातों में, यादों का सिलसिला,
हर ख्वाब में बसीं, वो पल की सुरीला।
लेकिन ये भी समझा, अब होने लगा स्वीकार,
टूटते सपनों से, फिर से खुद को संवार।
आगे बढ़ना है हमें, भले हो जुदाई की पीड़ा,
हर अंत में छिपा है, एक नया आरंभ का बीड़ा।
तो छोड़ दे मुझको, मैं भी तुझे छोड़ दूँ,
बस एक ख्वाब सा था, अब है ये अधूरा सफर।
-कवि लोकेश
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